हौसला बढ़ाते प्रोत्साहन के शब्द - GlobalPlus News

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Sunday, July 26, 2020

हौसला बढ़ाते प्रोत्साहन के शब्द

रेनू सैनी

प्रत्येक व्यक्ति जीवन में उन्नति करने की सोचता है लेकिन केवल कुछ ही लोग अपने मार्ग पर सफलतापूर्वक चलकर मंजिल तक पहुंच पाते हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है कि सभी सफल नहीं होते? इसका प्रमुख कारण है कि दरअसल सभी लोगों की आत्मा तक वह आॅक्सीजन नहीं पहुंच पाती जो उन्हें प्रगति के लिए प्रेरित करती है। इसलिए लोग हार मान कर बैठ जाते हैं।
प्रोत्साहन केवल व्यक्ति के लिए ही नहीं अपितु प्रत्येक प्राणी के लिए एक ऐसी आॅक्सीजन है, जिसकी पूर्ति होने पर व्यक्ति शिखर तक पहुंच जाता है। विलियम आर्थर फोर्ड तो इस बात को स्वीकार करते हुए कहते हैं कि, ‘मेरी चापलूसी करेंगे तो शायद मैं आपकी बात का विश्वास नहीं करूंगा। मेरी आलोचना करेंगे, तो शायद मैं आपको पसंद नहीं करूंगा। मुझे प्रोत्साहित करेंगे तो मैं आपको कभी भूल ही नहीं पाऊंगा।’ यह सत्य है। प्रत्येक व्यक्ति उस व्यक्ति व स्थिति का सदैव ऋणी रहता है, जिससे उसे प्रोत्साहन प्राप्त होता है। प्रोत्साहन के अभाव में लोग जीवन की दौड़ में स्वयं को बेहद पीछे पाते हैं। वहीं जरा सा प्रोत्साहन व्यक्ति के न केवल हुनर को सामने लेकर आता है, अपितु उसकी एक नई पहचान भी बनाता है। वर्ष 1903 का समय था। एक मजबूत व्यक्तित्व की स्वामिनी स्ट्रीट कार से न्यूयाॅर्क की यात्रा पर गई हुई थी। वहां पर उन्हें अपने रियल एस्टेट बिजनेस के संबंध में एक ग्राहक से मिलना था। सर्दियों का समय था। बर्फबारी हो रही थी। ऐसे में बर्फ कार के विंडशील्ड पर जम जाती। ऐसे में गाड़ी रोककर विंडशील्ड से बर्फ की परत को हटाकर, उसे कपड़े से अच्छी तरह साफ करना पड़ता था। लेकिन बर्फबारी के कारण कुछ आगे बढ़ते ही फिर से विंडशील्ड बर्फ से ढक जाती। इससे महिला को बेहद दिक्कत का सामना करना पड़ा। वह गाड़ी में बैठे साथी से बोली, ‘ऐसे तो हमें बहुत देर हो जाएगी।’ साथी मैडम की प्रतिभा से परिचित था। वह बोला, ‘आपके अंदर नई चीजों को ढूंढ़ने की जबरदस्त प्रतिभा है। अगर आप इस ओर ध्यान लगाएं तो मैं पक्का कह सकता हूं कि आप इसका कोई न कोई उपाय ढूंढ़ ही लेंगी।’ महिला काफी देरी से ग्राहक के यहां पहुंची, तब तक ग्राहक वहां से जा चुका था। इससे उनका जाना व्यर्थ हो गया और उनके व्यवसाय का सौदा भी हाथ से निकल गया।
विंडशील्ड पर बार-बार बर्फ गिरने के कारण ही उन्हंे देरी हुई थी। यह देखकर उनके मन में अपने साथी के शब्द बार-बार गूंजते रहे कि वे बेहद प्रतिभाशाली हैं। साथी के प्रोत्साहन के कारण महिला का आत्मविश्वास बुलंद था। उन्होंने उसी समय मन में निर्णय किया कि कुछ ऐसा करना होगा, जिससे कि बदलते मौसम का असर गाड़ी पर न पड़े और चालक एवं गाड़ी में सवार अन्य व्यक्ति सहजता से सफर करें ताकि उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े। घर लौटकर उन्होंने दिन-रात इस पर काम करना आरंभ कर दिया। एक दिन घर की सफाई करते समय उन्होंने ध्यान दिया कि फर्श पर पड़े पानी को वाइपर से बहुत अच्छी तरह साफ किया जा सकता है। उन्होंने स्वयं अनेक बार ऐसा करके देखा। अब उनके दिमाग ने तेजी से काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने एक विशाल ‘टी’ के आकार के विंडशील्ड वाइपर का निर्माण किया। इसे कार के अंदर से संचालित किया जा सकता था। उन्होंने तुरंत अपने इस आविष्कार को पेंटेट करा दिया। ये महिला कोई और नहीं बल्कि मैरी एंडरसन थीं। आॅटोमोबाइल्स के इतिहास में मैरी एंडरसन ने एक महत्वपूर्ण आविष्कार किया था।
यदि उस दिन मैरी एंडरसन को प्रोत्साहन नहीं मिला होता तो शायद आज भी गाड़ी पर से पानी अथवा बर्फ साफ करने के लिए बार-बार नीचे उतरना पड़ता। प्रोत्साहन सफलता का उत्प्रेरक है। इसमें अद्वितीय शक्ति होती है। आखिर प्रोत्साहन क्या होता है? प्रोत्साहन वह होता है, जिसे सुनकर दूसरे व्यक्ति को अंतर्मन से अच्छा महसूस होता है। प्रोत्साहन का रूप शब्द, मुस्कराहट, इनाम, मदद आदि हो सकते हैं। यूसीएलए के बास्केटबाॅल कोच जाॅन वुडन अपने खिलाड़ियों से कहते थे कि जब वे स्कोर करें तो अच्छा पास देने वाले खिलाड़ी की ओर देखकर मुस्कराएं। इससे अच्छा पास देने वाले खिलाड़ी का उत्साह चरम पर पहुंच जाएगा और वह अधिक प्रयत्न करेगा।
एक सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है कि जो माता-पिता अपने बच्चे की आलोचना अधिक और प्रोत्साहन कम करते हैं, वे बच्चे जीवन में उतने अधिक कामयाब नहीं हो पाते। वहीं जिन बच्चों को माता-पिता से प्रोत्साहन प्राप्त होता रहता है, वे औसत होने पर भी जीवन में कामयाब हो जाते हैं। मगर, हां प्रोत्साहन और चापलूसी दोनों अलग-अलग हैं। चापलूसी इनसान अपने लाभ के लिए करता है और इसमें बेवजह की प्रशंसा अधिक होती है। वहीं प्रोत्साहन प्रतिभाशाली व्यक्ति को कहीं से भी प्राप्त हो सकता है और यह गुणों पर ही आधारित होता है।

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