मधु गोयल
गर्मी के दिन शुरू होते ही मिट्टी के घड़े यानी देसी फ्रिज की मांग बढ़ जाती है। गर्मी में मटके का पानी जितना ठंडा और सुकूनदायक लगता है, स्वास्थ्य की दृष्टि से उतना ही फायदेमंद भी होता है। गर्मी के दिनों में फ्रिज का ठंडा पानी पीने की बजाय मटके का पानी पीना ही बेहतर है। ज़रूर जानिये, मटके का पानी पीने के बेशकीमती फायदे :-
बढ़ाए रोग प्रतिरोधक क्षमता
यदि मटके का पानी नियमित रूप से पीया जाए तो रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है। यदि प्लास्टिक की बोतलों में पानी स्टोर करते हैं तो प्लास्टिक पानी को अशुद्ध कर देता है। यह शरीर के लिए हानिकारक है।
हॉर्मोन वृद्धि
नियमित रूप से मटके का पानी का सेवन करने से पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन का स्तर उच्च होता है।
पीएच बैलेंस
मटके के क्षारीय गुण, पानी की अम्लता के साथ मिलकर, उचित पीएच संतुलन प्रदान करते है। यह एसिडिटी पर रोक लगाने और पेटदर्द से राहत प्रदान करने में सहायक है।
त्वचा के लिए फायदेमंद
मिट्टी के बर्तन में रखा पानी पीने से फोड़े, फुंसी, मुंहासे और अन्य त्वचा संबंधित कई रोग दूर हो जाते हैं। त्वचा भी दमकने लगती है।
एंटी कोलेस्ट्रोल
मटके का पानी ब्लड प्रेशर को तो नियंत्रित करता ही है, कॉलेस्ट्रोल को नियंत्रित करने में सहायक है।
एंटी बैक्टीरियल गुण
मिट्टी के बर्तन में रखा पानी अपने एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण डायरिया, पीलिया, डायसेंट्री जैसी बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।
एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण
शोधों से पता चला है कि मिट्टी में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसलिए, मिट्टी से बने पात्र में रखे पानी को पीने से शरीर में दर्द, ऐंठन या सूजन जैसी समस्याओं के उपचार में काफी कारगर है। गठिया रोग में भी बेहद लाभकारी माना जाता है।
एंटी-कैंसर
अमेरिकन सोसायटी आफ कैंसर के अनुसार मिट्टी के बर्तन में रखे पानी में अनेक कैंसर-विरोधी तत्व मौजूद होते हैं।
गला खराब नहीं होता
मटके में रखा पानी सुखदायक प्रभाव देता है। इसे पीने से गला खराब नहीं होता। जब भी फ्रिज का ठंडा पानी पीते हैं, तब गले की कोशिकाओं का ताप सामान्य होता है और ठंडा पानी पीते ही अचानक कम हो जाता है, गला खराब होने की आशंका बढ़ जाती है।
हर मौसम में फायदेमंद
मटके के पानी का प्रयोग हर मौसम में कर सकते हैं। मटके के पानी में बहुत से औषधि गुण होते हैं।
अन्य मिट्टी के पात्र
मिट्टी से केवल मटका ही नहीं बल्कि सुराही, बोतल, जग और अब तो मिट्टी से बनी टोंटी वाली टंकी भी बाज़ार में उपलब्ध है। मिट्टी से बने सभी पात्रों में वही गुण होते हैं, जो मटके के हैं।
कैसे करें सफाई
हल्के गर्म पानी और साफ हाथों से, मटके की अंदरूनी दीवारों को साफ करें। बाद में, हल्के गर्म पानी से खंगाल कर धूप में सूखने के लिए रख दें। सूखने पर दोबारा पानी भर लें। मटका खरीदते समय उस पर किसी तरह का रंग नहीं लगा होना चाहिए।
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